shah umair ki pari

Shah Umair Ki Pari-11

shah umair ki pari
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शाह उमैर की परी -11
शहर धनबाद में :

परी ख्वाबों की दुनियाँ में धीरे धीरे क़दम रखती है जहां उसे एक खूबसूरत फूलों से भरे पेड़ पर लगा झूला दिखता है ! जिस के ठीक बगल में वही लड़का खड़ा होता है जिसे परी पहले भी खवाब में देख चुकी होती है !
”परी मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा हु आओ बैठो यहा !’’ उमैर परी को झूले पर बैठने का इशारा करते हुए कहता है !
”तुम्हे तो मैंने अपना नाम बताया नहीं फिर तुम्हे कैसे पता मेरा नाम ? और तुम्हारा नाम क्या है ? ” परी उमैर का हाथ पकड़ कर झूले पर बैठती हुई कहती है !
”मेरा नाम शाह उमैर है और मुझे तुम्हारा नाम ही नहीं बल्के तुम्हारे दिल में जो भी बातें चल रही है सब पता है ! मगर मैं चाहता हु के तुम्हारे साथ जो भी परेशानी है तुम खुद मुझे बताओ !” उमैर परी को झूला झुलाते हुए कहता है !
”बहुत ही प्यारा नाम है तुम्हारा शाह उमैर , परी मुस्कुरा कर कहती है तो साथ में उमैर भी मुस्कुराता है !
”मेरी परेशानिया तब शुरू हुई जब पापा का एक्सीडेंट हुआ था ! फिर परी एक एक कर के सारी बातें उमैर को बताती है !”
”बहुत ही अच्छा किया तुमने जो उस बेगैरत इंसान के यहा काम छोड़ दिया ! मैं हु ना इंशाल्लाह तुम्हे आज के बाद से किसी चीज़ की कमी नहीं होने दूंगा और तुम देखना तुम्हारे पापा भी अपने पैरों पर धीरे धीरे चलने लगेंगे ! चलो हम उधर घांस पर बैठ कर बातें करते है ! उमैर कहता है फिर परी का हाथ थामे घनी और छोटी छोटी फूलों से भरी घांसों के बीच आकर बैठ जाता है !
”तुम्हारी नीली आँखे तो बेहद खूबसूरत है उमैर और इनमे देखने से ऐसा मालूम होता है मानो समन्दर की लहरे उमड़ रही और शोर मचा रही !” परी उमैर के सामने बैठे उसके आँखों को देखते हुए कहती है ! थोड़ी देर के लिए दोनों एक दूसरे की आँखों में खो से जाते है
”तारीफ के लिए शुक्रिया ! परी अब तो हम दोनों दोस्त है ना अगर तुम बुरा ना मनो तो क्या मैं तुम्हारे गोद में सर रख कर थोड़ी देर लेट जाऊ जिस तरह तुम अपनी अम्मी की गोद में लेटी थी ! पता है मेरी अम्मी नहीं है बचपन में ही वो अल्लाह को प्यारी हो गयी थी तब से अब्बा ने पाला है हमे इसलिए मोहब्बत नसीब कम ही हुई है !” उमैर कहता है
‘’हाँ बिलकुल उमैर अब हम दोस्त है और तुम मुझे अच्छे भी लगने लगे हो ! परी ने कहती है तो उमैर परी की गोद में सर रख कर थोड़ी देर सुकून से आँखे बंद किये रहता है और परी उसके रुई से मुलायम बालों में बड़े ही प्यार वा शफ़क़त से हाथ फेरती है !
”परी सुनो तुम्हारे कमरे में जो आईना है तुम अपने पैसों वाला पर्स वही पर रख देना और तुम्हे जो भी चाहिए बस मुझे बता देना मैं सब पूरा करदूंगा !” उमैर आँखे बंद किये कहता है !
”मगर तुम यह सब मेरे लिए क्यों करना चाहते हो ? ” परी कहती है !
‘’पहले तो एक दोस्त होने के नाते दूसरी बात वक़्त आने पे खुद बा खुद समझ जाओ गी ! उमैर कहता है !
परी सपने में घंटो उमैर से बात करती रहती है !
”परी बेटा उठो क्या हो गया है तुम्हे आज तुम्हे ऑफिस नहीं जाना है क्या ? अभी तक सोयी हो और यह कैसी परफ्यूम लगायी है तुमने बहुत ही अच्छी खुश्बू आरही !” नदिया जी परी को उठाती हुई कहती है!
परी हड़बड़ा कर उठ बैठती है और अपने कपड़े सूंघते हुए कहती है !” खुश्बू कैसी खुश्बू मम्मी ? क्या सुबह हो गयी है? मगर मम्मी मैं तो अभी अभी सोयी ही थी ! और मैंने कोई परफ्यूम नहीं लगाया है! पता नहीं मेरे कपड़ो में ये महक कहा से आगयी है ! खैर आप भी ना मम्मी मुझे अच्छी नींद से जगा दिया! कितना अच्छा ख्वाब देख रही थी मैं!”
” बावली हो गयी है तू! तुम्हे पता भी है तुम कल शाम से सोयी हुई हो ! रात में तेरे पापा और मैंने खाना खाने के लिए कई बार तुम्हे उठाया मगर तुम हिल तक नहीं रही थी ! चलो अब उठ जाओ वरना ऑफिस के लिए लेट होजाओगी !” नादिया जी कहते हुए चली जाती है !
”सच में मैं इतनी गहरी नींद सोयी थी मगर वो ख्वाब और वो लड़का शाह उमैर!” परी कहती हुई पानी का बोतल उठा कर मुँह से लगाए हुए आईने के पास जाकर गौर से आईने में देखती है ! उसे आईने में उमैर की झलक दिखती है वो डर कर पिछे हटती ,उसके मुँह का पानी कुछ आईने में और कुछ फर्श पर गिर जाता है जिससे उसका पैर फिसलता है और वो जैसे ही गिरने लगती है उसे ऐसा महसूस होता है जैसे किसी ने उसे थाम लिया हो वो खुद बा खुद सिधा खड़ी होजाती है ! सब कुछ इतना जल्दी होता है के उसे समझ ही नहीं आता के उसके साथ क्या हुआ ? , दुबारा आईने में झाँकने की उसकी हिम्मत नहीं होती है और वो भागती हुई अपनी मम्मी के पास जाती है !
अरे क्या हुआ परी तुम इस तरह दौड़ क्यों रही हो ! परी के पापा हसन जी कहते है !
जी जी वो वो। …. बस ऐसे ही !” परी कहती है
”अच्छा ठिक है जब तक तुम रेडी हो रही अपना मोबाइल मुझे देना जरा मैच स्कोर और न्यूज़ देख लू !” हसन जी अपने व्हील चेयर पर टेक लगाए हुए कहते है !
”जी पापा अभी लाती हु कहते हुए परी डर डर कर अपने कमरे में क़दम रखती है !
बेटा तुम इतना क्यों डर रही हो ? चूहा है क्या कमरे !” हसन जी कहते है
नहीं पापा मैं तो बस ऐसे ही ” कहते हुए परी हिम्मत कर के कमरे में जाती है उसे याद आता है के उसने कल से मोबाइल बैग से निकाला ही नहीं है !
परी आईने के ड्रेसिंग पे पड़े अपने बैग को उठाती और मोबाइल निकालने के लिए जैसे ही बैग की चैन खोलती है उसमे 500 के नोट की छे गाडिया उसके बैग में पड़ी रहती है ! उसकी आँखे हैरत से फटी रह जाती है !
या खुदा इतने सारे पैसे मेरे बैग में कहा से आगये ! क्या रात में ख्वाब वाली बात सच तो नहीं? परी अपने उलझनों खड़ी रुपयों को उल्ट पलट कर देखती रहती है !


दुसरी दुनियाँ ‘’ ज़ाफ़रान क़बीला :

”अमाइरा मेरी बहन अब तुम ही मेरी परेशानियों का कोई हल निकालो मैं बहुत परेशान हो गया हु अपनी इस ज़िन्दगी से जिसे अब्बा ने अपने कण्ट्रोल में कर रखा है !” उमैर घर पहुँचते ही अमाइरा से कहता है !
”क्या बात हो गया उमैर भाई आप इतना परेशान क्यों है ?” अमाइरा उमैर को परेशान देख कर कहती है !
‘क्या होगया है? यह पूछो क्या नहीं हुआ है ? पहले तो अब्बा सब के सामने बस डांटते थे मगर आज, आज अब्बा ने हनीफ के सामने मुझे अपने जूते से मारा !”उमैर रोती हुई शक्ल बना कर कहता है !
पिछे से नफिशा हंसती हुई आती है और कहती है !” उमैर भाई कितने जूते मारे आप को अब्बा ने !”
”नफिशा तुम चुप रहो फिलहाल वरना तुम्हे मुझसे पिटाई पड़ जाएगी !”उमैर नफिशा को डांट लगाते हुए कहता है तो वो खामोश होजाती है !
”आप ने जरूर कोई शरारत की होगी भाईजान जिससे अब्बा को गुस्सा आगया होगा !” अमाइरा समझाते हुए कहती है !
”हाँ मैं ही गलत रहता हु हमेशा और अमाइरा तुम भी मुझे ही गलत कह रही हो ! काश के अम्मी ज़िंदा होती तब अब्बा तो क्या कोई भी मुझपे जुल्म नहीं करता !” उमैर उदास लहज़े में कहता हुआ अपने कमरे में आईने के पास आकर बैठ जाता है ! जहाँ उसे परी अपनी मम्मी के गोद में सर रखे सोती दिखती है !
”चलो मुझे ना सही मगर मेरी परी को तो माँ की गोद नसीब है ! हाय जब भी इसे देखता हु ना अमाइरा लब खुद बा खुद मुस्कुरा जाते है !” एक ठंडी आह भरते हुए उमैर कहता है !
”मैं खाना लगा देती हु आप मुँह हाथ धो ले भाई !” अमाइरा कहती है !
”अभी नहीं पहले मैं परी से मिल कर आता हु तब हम सब साथ में खाएंगे !” उमैर कहता हुआ गायब होजाता है !
उमैर वापस आता है तो देखता है अमाइरा उसके बेड पे दस्तर खवान पे खाना लगाए बे खबर सोयी रहती है ! वो मज़ाकिया अंदाज़ में एक चाटा मार कर अमाइरा की नींद में खलल डालता है और कहता है !”कब से मैं खाना खाने के लिए बैठा हु मगर तुम्हे तो नींद से फुर्सत ही कहा है और अब तो सुबह भी हो चुकी है तुम्हारे उठने का इंतज़ार करते करते !”
क्या उमैर भाई ? कितनी जोर से मारा आप ने ! मैं सुबह की नमाज़ के बाद सोयी हु सारी रात आप के इंतज़ार में थी कहा गए थे आप मुझे साथ खाना खाने का कह के ? अमाइरा अपने गालों को सहलाते हुए कहती है !
गया तो था वापस आने के लिए मगर तेरी भाभी के गोद में इतनी अच्छी नीदं आयी के क्या बताऊ तुझे ! देख कितनी मासूमियत से सोयी हुई है तेरी भाभी ! उमैर आईने के उस पार परी को देखते सामने हुए कहता है !
या अल्लाह भाईजान आप इंसानी दुनियाँ में गए थे आप को अब्बा ने कसम दिया है ना !” अमाइरा मुँह पे हाथ रखते हुए हैरत से कहती है !
”अरे नहीं पागल मैं तो अभी उसके ख्वाब में उससे जान पहचान बढ़ा रहा हु ! जिस रोज वो मेरी मोहब्बत को अपने अंदर महसूस करने लगेगी उस दिन उसके सामने आजाऊंगा फ़िलहाल ख्वाबों में ही मोहब्बत भरी बातें होगी !” उमैर अमाइरा के साथ बर्तन उठाए किचन में जाते हुए कहता है !


नफिशा अभी तक सो कर नहीं उठी क्या ? उमैर नहा कर आईने के सामने अपने बालो को सवारते हुए कहता है तो सामने उसे परी पानी की बोतल मुँह में लगाए आईने के पास आती दिखती है ! उमैर शरारत से खुद को परी के सामने ज़ाहिर करता है तो परी के मुँह का पानी डर से उसके मुँह से निकल कर उमैर के चेहरे पर पड़ जाते है !
उमैर भाई भाभी ने तो आप के चेहरे को देख कर कुल्ला कर दिया !”अमाइरा और नफिशा हँसते हुए उमैर के पास आते हुए कहती है !
”उसने डर से कुल्ला किया पागलों ! और नफिशा की बच्ची तुम इतनी देर तक सोते रहती है अब चलो जाओ नास्ता लेकर आओ मुझे महल भी जाना है वरना अब्बा मेरी खबर अच्छे से लेलेंगे इस बार !” उमैर कहता है फिर आईने के उस तरफ पड़े परी के बैग में जादू से ढेरों रूपए रख कर नास्ता करने के लिए पलंग पर बैठ जाता है !
”उमैर भाई आपी बता रही थी अभी के आप ख्वाब में परी भाभी से मिलने जाते हो ! कुछ बात आगे बढ़ी आप लोग की ”नफिशा नास्ता लगा कर बैठते हुए कहती है !


”अभी तक तो दोस्ती हो गयी है मगर उसे सब एक ख्वाब ही लगता है मुझे उसे एहसास दिलाना है के वो जो कुछ भी देखती है सब सच है !”उमैर खाते हुए कहता है !
”जरा हमे भी बताये भाई के क्या क्या बातें हुई आप दोनों के बीच ? ”अमाइरा नास्ते के लिए बैठती हुई कहती है !
”ज्यादा कुछ नहीं मगर उसकी ज़िन्दगी में बहुत सारी मुश्किलात है ! जिसमे उलझी हुई है वो जिस जगह वो घर चलाने के लिए काम करती थी वहा उसके मालिक ने उसकी इज्जत पे हाथ डालने की कोशिश की थी इसने वहा काम छोड़ दिया अब घर कैसे चलेगा इन्ही बातों में उलझी हुई है वो !”उमैर कहता है
”तब तो भाई आप को उनकी मदद करनी चाहिए हर तरह से !”अमाइरा कहती है
”हाँ मैं हमेशा उसका साथ दूंगा बहुत प्यारी है वो ! मेरे तो ख्यालों में भी नहीं आया था के कोई मुझे इतनी अच्छी सख्सियत वाली मिलेगी ! मगर अब्बा महल से कहा आने देते है मुझे हमेशा छुप कर आता जाता हु !” उमैर कहता है !
भाई आप परेशान ना हो मैं अब्बा से कहूँगी के वो आप को घर आने से ना रोका करे ! नफिशा कहती है !
उसी वक़्त दरवाज़े पे दस्तक होती है तो उमैर के मुँह से खाना गिर जाता और वो कहता है! ”लगता है अब्बा आगये अब तो मेरी खैर नहीं !”
आप खबराए नहीं भाई और ना ही आप को गायब होने की जरुरत है अब्बा से हम दोनों बहने बात करेंगे आज और अभी ! अमाइरा और नफिशा एक साथ कहती है !
अमाइरा दरवाज़ा खोलने जाती है और उमैर डर से पसीने पसीने होने लगता है !


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कोई है मुन्तज़र उनका उन्हें भी हो यह ऐतबार ,
इश्क़ की आंधी चल रही कभी इस पार तो कभी उस पार !
उमड़ते है जज़्बात दिल में उन्हें दिल से लगाने को ,
यह आग भी लग ने लगी है अब उस पार !”

Shama Khan

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