Tamanna Ae Khaam -03

Tamanna Ae Khaam -03 तमन्ना_ऐ_खाम -03 एक नयी सुबह का आगाज हो चुकी होती है…! अलफ़ाज़ तैयार होकर नाश्ता तैयार करती है., राही को उसके बर्तन में नाश्ता देकर वो खुद भी नास्ता करती है…! फिर वो अपनी स्कूटी और शॉप की चाभी लेकर घर से निकलती है…! घर के बाहर का मौसम काफी खुशगवार…

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Tamanna_Ae_Khaam-01

Tamanna_Ae_Khaam-01 तमन्ना ऐ खाम-01 हम में से हर एक की जिंदगी अंगिन्त ख्वाहिशों के बोझ तले दबी होती है, जिनमें से ज्यादतर ख्वाहिशें हमारी अधूरी ही रहती है! जिनके पूरा ना होने का दर्द हमें कभी कभी अंदर से खोखला कर जाता है! उसी तरह हम में से हर एक इंसान का कोई ना कोई…

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Ishq Ek Bla-03-End

Ishq Ek Bla-03-End “मेरी दिल की सुकून, मेरी जान ज़ारा , अस्सलाम ओ अलैकुम मैं यहां खैरियत से हूँ और उम्मीद करता हूँ के तुम भी खैरियत से होगी ! तुम्हारा खत मुझे वक्त पर मिल गया था ! पढ़ कर काफी ख़ुशी हुई और थोड़ा ताज्जुब भी , तुमने ऐसा क्यों कहा के हमारा…

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Ishq Ek Bla-02

Ishq Ek Bla-02 “इश्क़” एक बला – 02 जब तक ज़ैद की पढ़ाई चलती रही तब तक वो और जारा दोनों एक दूसरे से हफ्ते,या महीने में कभी कभार छुप छुप कर मिलते रहे..! वक़्त के साथ साथ ज़ारा और ज़ैद की मोहब्बत परवान चढ़ती रही , मगर ज़ारा की भाभी और भाई के सितम…

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Beti Rahmat Ya Zahmat

BETI-Rahmat ya Zahmat-end

BETI-Rahmat ya Zahmat-end अपने शौहर के इंतज़ार में नींद की आगोश में जा चुकी शबनम की आँख रात के आखिरी हिस्से में खुलती है तो वो देखती है के वो बिस्तर पर अकेली ही है !“कितने बे हिश होगये है नाज़िम , उनको मेरी परवाह ही नहीं इतनी रात होगयी मगर वो कमरे में नहीं…

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Beti Rahmat Ya Zahmat

Beti Rahmat ya Zahmat 01

Beti Rahmat ya Zahmat 01 एक औरत जब वो बेटी होती है, अपने वालदैन के लिए जन्नत के दरवाज़े खोल देती है। जब वो बीवी बनती है, शौहर का आधा दीन मुकम्मल कर देती है। जब वो माँ बनती है, जन्नत उसके क़दमों में होती है। सुभान अल्लाह! ये मर्तबा है एक औरत का दीन-ए-इस्लाम…

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